Watan Ki Rah Mein Watan Ke Naujawan Shaheed Lyrics – वतन की राह में नौजवाँ शहीद
रोचक तथ्य
Shaheed (1948)
वतन की राह में वतन के नौजवाँ शहीद हो
पुकारते हैं ये ज़मीन-ओ-आसमाँ शहीद हो
वतन की लाज जिस को थी 'अज़ीज़ अपनी जान से
वो नौजवान जा रहा है आज कितनी शान से
इस इक जवाँ की ख़ाक पर हर इक जवाँ शहीद हो
है कौन ख़ुश-नसीब माँ कि जिस का ये चराग़ है
वो ख़ुश-नसीब है कहाँ ये जिस के सर का ताज है
अमर वो देश क्यों न हो कि तू जहाँ शहीद हो
शहीद तेरी मौत ही तिरे वतन की ज़िंदगी
तिरे लहू से जाग उठेगी इस चमन में ज़िंदगी
खिलेंगे फूल उस जगह पे तू जहाँ शहीद हो
ग़ुलाम उठ वतन के दुश्मनों से इंतिक़ाम ले
इन अपने दोनों बाज़ुओं से ख़ंजरों का काम ले
चमन के वास्ते चमन के बाग़बाँ शहीद हो
पहाड़ तक भी काँपने लगे तिरे जुनून से
तू आसमाँ पे इंक़लाब लिख दे अपने ख़ून से
ज़मीं नहीं तिरा वतन है आसमाँ शहीद हो
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