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Showing posts from March, 2026

चालीस भाइयों की पहाड़ी : कश्मीरी लोक-कथा : Lok-Katha (Kashmir)

Chalis Bhaiyon Ki Pahadi : Lok-Katha (Kashmir) कई साल पहले कश्मीर की ऊँची पहाड़ियों में एक धनी किसान रहता था, जिसका नाम द्रूस था। हालाँकि उसके पास बहुत सारी भेड़ें और मवेशी थे, लेकिन वह और उसकी पत्नी दोनों दु:खी थे, क्योंकि उनके विवाह के बाद से बच्चे नहीं हुए थे। उनकी प्रार्थनाएँ, संतों, पीरों और साधुओं की प्रार्थनाएँ भी बेकार चली गई थीं, उनका कोई परिणाम नहीं निकला था। एक दिन सफर से थका हुआ एक पीर गाँव में से होकर गुजरा। वह श्रीनगर में बागों और मेवे के उद्यानों के बीच आराम करने के रास्ते में था। जब वह द्रूस के टेंट के पास से गुजर रहा था, पीर ने आवाज लगाई, ‘अल्लाह के नाम पर अपनी खैरात मुझे दे दो। मेरे पास न तो गोश्त है और न ही रोटी का टुकड़ा है।’ लेकिन द्रूस ने जवाब दिया, “मैं अपनी जिंदगी के हर दिन दयालु रहा हूँ; लेकिन अभी तक मुझे एक बेटे का वरदान नहीं मिला है, इसलिए मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दूँगा।’ “जिसे जन्नत ने मना कर दिया, उसे कौन मंजूर कर सकता है!’ पीर ने निढाल होते हुए कहा और दूसरे टेंट की तरफ चल दिया। लेकिन पीर का युवा शिष्य, जो पीछे आ रहा था, ने आश्वस्त होकर अनुभव किया कि उसके पा...

हिंदी कविता, ग़ज़ल और लोकगीत संग्रह | Hindi Kavita, Ghazal & Lokgeet Bhajan Lyrics

हिंदी कविता, ग़ज़ल, लोकगीत, दोहे, कहानियाँ और भजन का सम्पूर्ण संग्रह ग़ालिब से गुलज़ार तक, कबीर से प्रेमचंद तक —  से अधिक सैकड़ों रचनाएँ, शायरी, लोकगीत, भजन, दोहे, हास्य-व्यंग्य और पुराने गीतों के लिरिक्स यहाँ उपलब्ध हैं। Hindi Kavita, Ghazal, Lokgeet, Dohe, Bhajan, Nazm, Kahani aur Hasya-Vyangya — sab ek jagah. 🎙️ ग़ज़ल 🎵 लोकगीत 🙏 भजन 📿 दोहे ✍️ कविता 🎬 पुराने गीत 😄 हास्य-व्यंग्य 📖 कहानियाँ 🕉️ स्तोत्र 🎙️ ग़ज़ल और नज़्म — Ghazal, Shayari & Nazm ग़ालिब, मीर, साहिर, गुलज़ार, फ़राज़ और 50+ शायरों की ग़ज़लें 📚 सम्पूर्ण ग़ज़ल संग्रह — All Poets Hub Hindi-Urdu Ghazal Collection — सभी शायर एक जगह 💬 शायरी और क़िता संग्रह Shayari, Qita aur sher ka khazana मिर्ज़ा ग़ालिब गुलज़ार मीर तकी मीर साहिर लुधियानवी गुलज़ार ग़ज़लें बहादुर शाह ज़फ़र कैफ़ी आज़मी अहमद फ़राज़ परवीन शाकिर ...

ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मानित विजेताओं को सूची

वर्ष लेखक का नाम भाषा 1965 जी. शंकर कुरुप मलयालम 1966 ताराशंकर बंद्योपाध्याय बंगाली 1967 कुवेम्पु कन्नड़ 1967 उमाशंकर जोशी गुजराती 1968 सुमित्रानंदन पंत हिंदी 1969 फ़िराक़ गोरखपुरी उर्दू 1970 विश्वनाथ सत्यनारायण तेलुगु 1971 बिष्णु डे बंगाली 1972 रामधारी सिंह दिनकर हिंदी 1973 डी. आर. बेंद्रे कन्नड़ 1974 वि. स. खांडेकर मराठी 1975 अकिलन तमिल 1976 आशापूर्णा देवी बंगाली 1977 के. शिवराम कारंत कन्नड़ 1978 अज्ञेय हिंदी 1979 बिरेंद्र कुमार भट्टाचार्य असमिया 1980 एस. के. पोट्टेक्काट मलयालम 1981 अमृता प्रीतम पंजाबी 1982 महादेवी वर्मा हिंदी 1983 मास्ति वेंकटेश अयंगार कन्नड़ 1984 ठाकाज़ी शिवशंकर पिल्लै मलयालम 1985 पन्नालाल पटेल गुजराती 1986 सच्चिदानंद राउतराय ओड़िया 1987 विष्णु वामन शिरवाडकर मराठी 1988 सी. नारायण रेड्डी तेलुगु 1989 कुर्रतुलऐन हैदर उर्दू 1...

रुहेलखंडी लोकगीत हिंदी में | Ruhelkhandi Lok Geet

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 होली के गीत त्योहारों को आधार बनाकर गीत लिखने की परम्परा हमारे देश में अत्यन्त प्राचीन है। भारतवर्ष के प्रत्येक हिस्से में प्रारम्भ से ऐसे गीतों की रचना की गयी जो विभिन्न त्योहारों के अवसर पर गाये जाते थे। रुहेलखण्ड क्षेत्र में ऐसे अनेक गीतों की रचना की गई, जिन्हें त्यौहारों के मौके पर गाया जाता है। होली के अवसर पर गाऐ जाने वाले गीतों की अपनी पृथक पहचान हैं। इन गीतों में कुछ इस प्रकार हैं-- होली गीत सं०- (i ) कल कहाँ थे कन्हाई हमें रात नींद न आई आओ -आओ कन्हाई न बातें बनाओ कल कहाँ थे कन्हाई हमें रात नींद न आई एजी अपनी जली कुछ कह बैठूँगी, सास सुनेगी रिसाई हमें नींद न आई। एजी तुमरी तो रैन -रैन से गुजरी, कुवजा से आँख लगाई हमें रात नींद न आई। एजी चोया चंदन और आरती, मोति न मांग भराई हमें रात नींद न आई। कल थे कहाँ कन्हाई हमें रात नींद न आई, आओ -आओ कन्हाई न बातें बनाओ, कल थे कहाँ कन्हाई हमें रात नींद न आई,। होली गीत सं०- (ii ) र्तृया होली में ला दो गुलाल मेरा जिया न माने रे, खाने को ला दो पूरी कचौरी चखने को लादो कवाब, मेरा जिया न माने रे। पीने को लादो लैमन बोतल चखने को लादो शराब मेरा जिया...