इक बुत से मुहब्बत – Ek But Se Mohabbat / Ravindra Jain

 इक बुत से मुहब्बत कर के

मैं ने यही जाना है

समझाये से जो न समझे

दिल ऐसा दीवाना है

इक बुत से मुहब्बत कर के ...


खूबसूरत है बला का और बला से कम नहीं

उसका ग़म भी तो लगे तो जग का कोई ग़म नहीं

चले पाँव दिलों पे रख के

उसका ही ज़माना है

इक बुत से मुहब्बत कर के ...


फूल चम्पे का हसीन बेहद मगर खुशबू नहीं

है मेरे महबूब में, न सब कुछ वफ़ा की बू नहीं

कुछ भी मुझे घर अपना

उस गुल से सजाना है

इक बुत से मुहब्बत कर के ...

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