सुन साहिबा सुन प्यार की धुन – Sun Sahiba Sun Pyar Ki Dhun / Ravindra Jain

 सुन साहबा सुन प्यार की धुन

हो मैने तुझे चुन लिया तू भी मुझे चुन

सुन साहबा सुन ...


कोई हसीना क़दम पहले बढ़ाती नहीं

मजबूर दिल से न हो तो पास आती नहीं

ख़ुशी मेरे दिल में हद से ज़्यादा है

तेरे संग ज़िन्दगी बिताने का इरादा है

ओ प्रीत के ये धागे तू भी संग मेरे बुन

सुन साहबा सुन ...


तू जो हाँ कहे तो बन जाए बात भी

हो तेरा इशारा तो चल दूँ मैं साथ भी

तेरे लिए सायबा नाचूँगी मैं गाऊँगी

दिल में बसा ले तेरा घर भी बसाऊँगी

हो डाल दे निग़ाह कर दे प्यार का शगुन

सुन साहबा सुन ...

सुन साहबा सुन ...


ओ मेरा ही ख़ून-ए-जिगर देगा गवाही मेरी

तेरे ही हाथों लिखी शायद तबाही मेरी

दिल तुझपे वारा है जान तुझपे वारूँगी

आए के न आए तेरा रस्ता निहारूँगी

ओ कर ले क़बूल मुझे होगा बड़ा पुन

सुन साहबा सुन ...

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