Shyam Abhimani O Shyam – Bhakti Song (श्याम अभिमानी ओ श्याम अभिमानी)

 श्याम अभिमानी ओ श्याम अभिमानी

तुम तो भए मथुरा के राजा रोती रही राधा रानी

राजा हुआ मैं औरों का लेकिन राधा मेरे मन की रानी

श्याम अभिमानी ...


अच्छा बताओ साँवरे काहे छोड़ा गोकुल गाँव रे

जिस बंसी के थे बावरे वो कर गई मन में घाव रे

बनते हो तुम दीनों के बन्धू नारी की पीड़ा नहीं जानी

श्याम अभिमानी ...


मेरी बन्सी में जितने गीत हैं सब राधा के मनमीत हैं

कब राधा अलग है श्याम से वो तो जुड़ गई है मेरे नाम से

चन्दा में ज्योति सीपों में मोती सागर में जैसे हो पानी


मोती की बातें छोड़ दो देखो टूटे दिल को जोड़ दो

ओ कुछ ऐसी थीं मजबूरियाँ जो बढ़ गईं अपनी दूरियाँ

सुबह का भूला संध्या को जो लौटे कहते हैं सब उसको ज्ञानी

श्याम अभिमानी ...

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