संत सालिगराम के दोहे (राधास्वामी सत्संग' के द्वितीय गुरु) Sant Saligram ke Dohe

 पिया मेरे और मैं पिया की, कुछ भेद न जानो कोई।

जो कुछ होय सो मौज से होई, पिया समरथ करें सोई॥

 

चुपके-चुपके बैठकर, करो नाम की याद।

दया मेहर से पाइयो, तुम सतगुरु परसाद॥


जो सुख नहिं तू दे सके, तो दुख काहू मत दे।

ऐसी रहनी जो रहे, सोई शब्द रस ले॥


सत्यनारायण कविरत्न के दोहे (भारतेंदु युग के कवि) Satyanarayan Kaviratn ke Dohe

सुंदरदास के दोहे (दादूदयाल के प्रमुख शिष्य) Sundardas ke Dohe

सुधाकर द्विवेदी के दोहे (गणितज्ञ और ज्योतिषाचार्य) Sudhakar Dwivedi ke Dohe

सैन भगत के दोहे (सैन समुदाय के आराध्य) Sain Bhagat ke Dohe

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