योग गीत | Yog Geet Maithili Lokgeet Lyrics

 


अहि योग नारि जनम लेल / योग गीत मैथिली लोकगीत


अहि योग नारि जनम लेल, रूसि पहु हमर विदेश गेल

कर्म अभाग हमर भेल, वारि वयस पहु तेजि गेल

अँचरहि कमल फुलित भेल, ताहि देखि भमरा लुबुधि गेल

पूर्व जन्म हम चुकलहुँ, गौर पुजि नहि सकलहुँ

भनहि विद्यापति गाओल, गौरी सुन्दर वर पाओल





माइ हे हमरहु जँ पहुँ तेजताह / योग गीत मैथिली लोकगीत


माइ हे हमरहु जँ पहुँ तेजताह, फल बुझताह

माइ हे बान्हि देबनि बनिसार, अधीन भय रहताह

माइ हे चान सुरूज जकाँ उगताह, उगि झपताह

माइ हे नैन जोड़ल सिनेह, फलक नहि छोड़ताह

माइ हे नाव डोरी जकाँ घुमताह, घुमि अओताह

माइ हे मुकरी देबनि ऐंठि, देहरि धेने रहताह

माइ हे भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल

माइ हे गौरी केँ बढ़नु अहिबात, सुन्दर वर पाओल





डाली कनक पसारल / योग गीत मैथिली लोकगीत


डाली कनक पसारल नैनहुँ योग बेसाहल

नैनहु कोनाकऽ अयलीह, सकल भुवन योग लयलीह

पहिलहि योगिन हर पकड़ल, दोसर भाव करू ओहि घर

तेसर पान लगाओल शिव गौरी संगहि खुआओल

भनहि विद्यापति गाओल, योगिनीक अन्त न पाओल





कहमाँसँ सुगा आयल / योग गीत मैथिली लोकगीत


कहमाँसँ सुगा आयल, नेह लायल

कहमा लेल बसेरा सुगा मन मोहल

फल्लां ठासँ सुग्गा आयल, नेह लायल

फल्लां गाम लेल बसेरा, सुग्गा मन मोहल

फल्लां ससुर पिजुरा गढ़ाओल, सुग्गा बझाओल

हे फल्लां सासु देथु आहर सुग्गा मन मोहब

एहन सुग्गा नहि पोसब जे पोस ने मानत

हे सुगबा होयत उड़ाँत, अपन गृह जायत

एहन सुग्गा हम पोसब जे पोस मानत

हे सुगबा होयत बुधियार, पलटि फेर आओत

भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल

हे गौरी केँ बढ़नु अहिबात, सुन्दर बर पाओल





पर्वत सँ योग हाँकल / योग गीत मैथिली लोकगीत


पर्वत सँ योग हाँकल, राजा जनक ऋषि

खसल अयोध्या मे जाय, जहाँ राम जनम लेल

क्यो नहि लेल अवतार, धनुष इहो तोड़त

क्यो नहि भेल वलवान, सिया लय जायत

रामचन्द्र लेल अवतार, धनुष इहो तोड़ल

लछुमन भेल वलवान, सिया लय जायत

तोड़ल धनुष दहोदिश फेकल, धनुष कएल तीनी खण्ड

मेदिनी घहराओल

भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल

धन सिया के भाग, राम वर पाओल





हमर योग नागर / योग गीत मैथिली लोकगीत


हमर योग नागर, गुण आगर

देश पैसि जोहय योगिक योग अवतारल

रुनुकि-झुनकि धिया चलतीह, पहु देखताह

पागक फेंच उधारि हृदय बीच राखल

हमर योग नागर, गुण आगर

खात खण्ड नव दीप, योग अवतारल

भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल

गौरी सुन्दर वर पाओल





माइ हे सात बहिन हम / योग गीत मैथिली लोकगीत


माइ हे सात बहिन हम योगिनी नैनहु थिकी जेठ बहिनी

माइ हे तिनकहुसँ योग सिखल तिन भुवन योग हांकल

माइ हे समुद्रहु बान्ह बन्हाओल तैं हम योगिनी कहाओल

माइ हे तरहथ दही जनमयलहुँ तैं हम योगिनी कहेलहुँ

माइ हे सुखायल गाछ पन्हगेलहुँ तैं हम योगिनी कहेलहुँ

माइ हे बांझिक कोखि पलटलहुँ तैं हम योगिनी कहेलहुँ

माइ हे भनहि विद्यापति गाओल योगिनीक अन्त न पाओल





दक्षिण पवन बहु नहुँ-नहुँ / योग गीत मैथिली लोकगीत


दक्षिण पवन बहु नहुँ-नहुँ पहुसँ मिलन हएत कबगहुँ

आँगन मोरा लेखे बिजुवन सूतक सेज विषम सन

फूजल केश निजुआयल गेरुआ मोहि न सोहायल

एहि अवसर पहु के पबितहुँ कर धए कंठ लगबितहुँ

आम मजरि महु तुअल, तैयो नहि पहु घूरल

दीप जरिय, जरिय ओरबाती, नैनक नोर भीजल छाती





कानथि धीया के माय सुनहु / योग गीत मैथिली लोकगीत


कानथि धीया के माय सुनहु जदुपति जी

भदेशी नहि करब जमाय भदेशे गमौताह, कहबनि प्रभु के बुझाय

घटक भंग घोंटब चानन देखि जनु भूलब, पाछा पछतौताह

कमलक फूल सन धीया, तैं ओहने बर लयताह

धीया संग रैनि गमाय, धीया बसि रहताह

भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल रे

गौरी के एहन सोहाग, सुन्दर वर पाओल रे





हम योगिन तिरहुत के / योग गीत मैथिली लोकगीत


हम योगिन तिरहुत के रे मन मोहब

हमहि नून पढ़ायब हमर बस रहताह

सएह सुनि मधुपुर जयताह, हीरा लयताह

सुबुधनि देतीह हाथ की मोन हर्षित होयताह

सुबुधनि धेलनि सनुक कि ताला ठोकि देल

माय बहिन बिछुअएली मुरूछिकऽ खसलीह





अपना मन के बड़ रे मनोरथ / योग गीत मैथिली लोकगीत


अपना मन के बड़ रे मनोरथ, धीया लए आस लगाइ जी

हमरो धिया के आस पुरबिहथि, खर्चा देब हम पठाइ जी

एकर निर्वाह हृदय बिच करिहथि, जुनि करिहथि विछोह जी

ससुर जमाय हँसिकऽ बजला, सरहोजि देलनि सुनाइ जी

पहुँ बिहुँसिकऽ तकलनि, सभ सखि नयन जुराइ जी





दालि भात मैदा केर पुआ / योग गीत मैथिली लोकगीत


दालि भात मैदा केर पुआ, ताहि पर घीव चपोरी जी

नाना भांति बने तरकारी, कृष्ण भये रसभोगी जी

जेमन बैसला कृष्ण कन्हैया, देथि सखि सभ गारी जी

माइ अहाँक के कहिय यशोदा, मथुरा सँ एली उढ़ारी जी

बाप अहाँक के कहिय नन्दजी, घर-घर मांगय सोहारी जी

बहिनी अहाँक कहिय सुभद्रा जी, रसिलबा संग सिधारी जी

पिउसी अहाँक कहिय कुन्ती, सेहो छथि पाँच भतारी जी

जेमन बैसला कृष्ण कन्हैया, देथि सखि सभ गारी जी





हमरो सोहाग के ननुआ जमाय / योग गीत मैथिली लोकगीत


हमरो सोहाग के ननुआ जमाय, उज्जर घोड़ा चढ़ि आइ जी

कारी कम्मल झारी गंगाजल, दलाने दियनु पठाइ जी

सात सासु के एकेटा जमइया, घर मिनती पठाइ जी

सुन्दर सार आंगुर धय ठाढ़ भेला, सरहोजि झलक देखाइ जी


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