बिंदायक जी के गीत / 2 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Bindayak Ji Ke Geet 2 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics
एभल ओरां र नगर ने जावो बिंदायक जाओ बिंदायक।
जयपुर नगर उमाओ।
एभल ओरांरी बिरध न जाओ बिंदायक जाओ बिंदायक।
किणीराम जी बिरध उमाओ।
एभल बाजेट्या रो बैसण ल्हो बिंदायक ल्हो बिंदायक।
सिंघासण रो रहसी उमाओ।
एभल सुतरो वस्तर ल्हो बिंदायक ल्हो बिंदायक।
पाठरी रहसी उमाओ।
एभल लापसड़यां रो जीमण ल्हो बिंदायक ल्हो बिंदायक।
पैड़ारो रहसी उमाओ।
एभल लूंगारी मोछण ल्हो बिंदायक ल्हो बिंदायक।
बिड़ला रो रहसी उमाओ।
ए परवार बना थारा दादाजी चिरंजी-चिरंजी
थारा दादी जी रो अमर सवागो।
ए परवार बना थारा बाबूजी चिरंजी थारा बीराजी चिरंजी।
जी थारी मायड़ रो सरब सवागो थारो भाभियां रो अमर सवागो।
एभल बना थारा फूफाजी चिरंजी थारा जीजाजी चिरंजी।
जी थारी भूवा रो सरब सवागो थारी बहणा रो अमर सवागो।
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