सूरज जी के गीत / 1 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Suraj Ji Ke Geet 1 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

डूंगरिया री खिड़कियां सूरज मल उगियो।
पोढया जागो जी बिंदायक जी ओ आप, सूरज मल उगियो।
थांके घर है जी सेवकड़ा रो ब्याव सूरज मल उगियो।
थांन रिद्ध सिद्ध ओ राजा करवण जोग सूरज मल उगियो।
थांकी नगरी में राजा हरक उछाव, सूरज मल उगियो।
डूंगरिया री खिड़कियां सूरज मल उगियो।
जागो-2 जी… आप, सूरज मल उगियो,
थांके घर है जी बेटा पोता को ब्याव, सूरज मल उगियो।
थांने रुपया ओ राजा खरचण जोग सूरजमल उगियो।
थांने काम जी राजा करवण जोग, करवण जोग, सूरज मल उगियो।
डूंगरिया री खिड़कियां सूरज मल उगियो।
जागो-जागो जी मारेती ओ आप, सूरजमल उगियो।
थांक घर है जी भाणेज रो ब्याव, सूरजमल उगियो।
थांने मायरो हो राजा पेरावण जोगा सूरजमल उगियो।
डूंगरिया री खिड़कियां सूरज मल उगियो।
जागो-जागो जी सगला सवासणा आप, सूरजमल उगियो।
थांन आरत्यो ओ राजा करवण जोग, सूरजमल उगियो।
थांक घर है जी साला-साली रो ब्याव सूरजमल उगियो।
थांक कुतरा ओ राज ताड़न जोग सूरजमल उगियो।

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