सगुण रूप में सद्गुरू अइलै /Sagun Roop Mein Sadguru Ailai, Ramdhari Singh 'Kavyatirth'

 

सगुण रूप में सद्गुरू अइलै
सतपाल नाम धरैलकै हो।
सगुण-अगुन बीच कुच्छु भेद नै।
प्रेमी के निर्मल ज्ञान बतैलकै हो।
घट-घट में निर्गुण ब्रहह्म बसै छै
सब्भे सन्तें बतैलकै हो
मुहम्मद ईसा राम कृष्ण ने
एक्के ज्ञान बाँटलकै हो। 



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ