मोहन हम भी तुमसे रूठे! बिन्दु जी भजन

 Mohan Ham Bhi Tumse Roothi! Bindu JiBhajan

मोहन हम भी तुमसे रूठे!
जान गए हम छली प्रपंची हो कपटी और झूठे,
पहले शरण बुलाया हमको दे-देकर लोभ अनूठे,
अब इस बार दरस देने में दिखलाए अँगूठे,
सुनते हैं देते थे सबको तब सुख भर-भर मूठे,
हमने शत-शत ‘बिन्दु’ भए दिए न टुकड़े जूठे॥ 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ