Kriparam Khidiya Saurathaa कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा रचनाएं

 औरूं अकल उपाय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

औरूं अकल उपाय, कर आछी भूंडी न कर।.

जग सह चाल्यो जाय, रेला की ज्यूं राजिया॥.

auruu.n akal upaay, kar aachhii bhuu.nDii n kar।.

jag sah chaalyo jaay, rela kii jyuu.n raajiyaa||.

auruu.n akal upaay, kar aachhii bhuu.nDii n kar।.

jag sah chaalyo jaay, rela kii jyuu.n raajiyaa||.

और भी बुद्धि लगाकर भला करने का उपाय करो, किसी का बुरा मत करो। यह संसार तो पानी के रेले की तरह निरंतर बहता चला जा रहा है। यानी क्षणभंगुर जीवन की सार्थकता सत्कर्मों से ही है।

हिम्मत कीमत होय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

हिम्मत कीमत होय, बिन हिम्मत कीमत नहीं।.

करै न आदर कोय, रद कागद ज्यूं राजिया॥.

himmat kiimat hoy, bin himmat kiimat nahii.n।.

karai n aadar koy, rad kaagad jyuu.n raajiyaa||.

himmat kiimat hoy, bin himmat kiimat nahii.n।.

karai n aadar koy, rad kaagad jyuu.n raajiyaa||.

हिम्मत से ही मनुष्य का मूल्यांकन होता है पर पुरुषार्थ-हीन पुरुष का कोई महत्व नहीं। साहस से रहित व्यक्ति, रद्दी काग़ज़ की भांति होता है, जिसका कोई आदर नहीं करता।

मतलब री मनवार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

मतलब री मनवार, नैत जिमावै चूरमा।.

बिन मतलब मनवार, राब न पावै राजिया॥.

matlab rii manvaar, nait jimaavai chuurama।.

bin matlab manvaar, raab n paavai raajiyaa||.

matlab rii manvaar, nait jimaavai chuurama।.

bin matlab manvaar, raab n paavai raajiyaa||.

अपना मतलब सिद्ध करने के लिए तो लोग न्यौता देकर मनुहार के माथ चूरमा (मीठे व्यंजन) खिलाते हैं, किंतु बिना मतलब के राबड़ी भी नहीं पिलाते।

उपजावै अनुराग कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

उपजावै अनुराग, कोयल मन हरखत करै।.

कड़वौ लागै काग, रसना रा गुण राजिया॥.

upjaavai anuraag, koyal man harkhat karai।.

kaD़vau laagai kaag, rasna ra gu.n raajiyaa||.

upjaavai anuraag, koyal man harkhat karai।.

kaD़vau laagai kaag, rasna ra gu.n raajiyaa||.

कोयल लोगों के मन में प्रेम उत्पन्न कर उन्हें आनंदित करती है, जबकि कौवा सब को कड़वा लगता है। यह सब वाणी का ही परिणाम है।

प्रभुता मेरु प्रमांण कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

प्रभुता मेरु प्रमांण, आप रहै रजकण इसा।.

जिके पुरुष धन जांण, रविमंडल विच राजिया॥.

prabhuta meru pramaa.n.n, aap rahai rajak.n isa।.

jike purush dhan jaa.n.n, ravima.nDal vich raajiyaa||.

prabhuta meru pramaa.n.n, aap rahai rajak.n isa।.

jike purush dhan jaa.n.n, ravima.nDal vich raajiyaa||.

जिनकी प्रभुता तो पर्वत-सदृश महान् है, किंतु जो स्वयं को रज-कण के समान तुच्छ समझते हैं, वे ही पुरुष संसार में धन्य है।

क्यों न भजै करतार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

क्यों न भजै करतार, साचै मन करणी सहत।.

सारौ ही संसार, रचना झूठी राजिया॥.

kyo.n n bhajai kartaar, saachai man kar.na.ii sahat।.

saarau hii sa.nsaar, rachna jhuuThii raajiyaa||.

kyo.n n bhajai kartaar, saachai man kar.na.ii sahat।.

saarau hii sa.nsaar, rachna jhuuThii raajiyaa||.

मनुष्य सच्चे मन और कर्म से परमात्मा का भजन क्यों नही करता? यह सारा संसार तो मिथ्या है, सत्य तो एकमात्र ईश्वर है।

हुन्नर करौ हज़ार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

हुन्नर करौ हज़ार, सणय चतुराई सहत।.

हेत कपट विवहार, रहै न छांना राजिया॥.

hunnar karau haज़.aar, sa.nay chaturaa.ii sahat।.

het kapaT vivhaar, rahai n chhaa.nna raajiyaa||.

hunnar karau haज़.aar, sa.nay chaturaa.ii sahat।.

het kapaT vivhaar, rahai n chhaa.nna raajiyaa||.

चाहे हज़ारों तरह की चालाकी और चतुराई क्यों न की जाए, किंतु प्रेम और कपट का व्यवहार छिपा नहीं रहता।

पल पल में कर प्यार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

पल पल में कर प्यार, पल पल में पलटै परा।.

ऐ मतलब रा यार, रहै न छांना राजिया॥.

pal pal me.n kar pyaar, pal pal me.n palTai para।.

ai matlab ra yaar, rahai n chhaa.nna raajiyaa||.

pal pal me.n kar pyaar, pal pal me.n palTai para।.

ai matlab ra yaar, rahai n chhaa.nna raajiyaa||.

जो लोग पल-पल में प्यार (का प्रदर्शन) करते हैं और क्षण-क्षण में बदल भी जाते हैं, ऐसे मतलबी यार-दोस्त छिपे नहीं रह सकते।

चोर चुगल वाचाल कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

चोर चुगल वाचाल, ज्यांरी मांनीजे नहीं।.

सेंपड़ावै घसकाळ, रीती नाड्यां राजिया॥.

chor chugal vaachaal, jyaa.nrii maa.nniije nahii.n।.

se.npDaavai ghaskaaL, riitii naaDyaa.n raajiyaa||.

chor chugal vaachaal, jyaa.nrii maa.nniije nahii.n।.

se.npDaavai ghaskaaL, riitii naaDyaa.n raajiyaa||.

चोर, चुगल और गप्पी व्यक्तियों की बातों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये लोग प्रायः रिक्त तलाइयों में ही नहला देते हैं, अर्थात् थोथी बातों से ही भ्रमित कर देते हैं।

लह पूजा गुण लार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

लह पूजा गुण लार, नह आडंबर सूं निपट।.

सिव वंदै संसार, राख लगायां राजिया॥.

lah puuja gu.n laar, nah aaDa.mbar suu.n nipaT।.

siv va.ndai sa.nsaar, raakh lagaayaa.n raajiyaa||.

lah puuja gu.n laar, nah aaDa.mbar suu.n nipaT।.

siv va.ndai sa.nsaar, raakh lagaayaa.n raajiyaa||.

गुण के पीछे पूजा होती है, न कि आडंबर से। भस्मी लगाए रहने पर भी शिव की वंदना सारा संसार करता है।

अवनी रोग अनेक कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

अवनी रोग अनेक, ज्यांरौ बिध कीधौ जतन।.

इण परकत री एक, रची न ओखद राजिया॥.

avnii rog anek, jyaa.nrau bidh kiidhau jatan।.

i.n parkat rii ek, rachii n okhad raajiyaa||.

avnii rog anek, jyaa.nrau bidh kiidhau jatan।.

i.n parkat rii ek, rachii n okhad raajiyaa||.

पृथ्वी पर अन्य कई रोग हैं, जिनके विधाता ने इलाज बताए हैं; किंतु स्वभाव/आदत के इलाज की एक भी दवा उसने नहीं रची।

पाटा पीड़ उपाव कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

पाटा पीड़ उपाव, तन लागां तरवारियां।.

वहै जीभ रा घाव, रती न ओखद राजिया॥.

paaTa piiD upaav, tan laagaa.n tarvaariyaa.n।.

vahai jiibh ra ghaav, ratii n okhad raajiyaa||.

paaTa piiD upaav, tan laagaa.n tarvaariyaa.n।.

vahai jiibh ra ghaav, ratii n okhad raajiyaa||.

शरीर पर तलवार से लगे घावों की पीड़ा का तो मरहम-पट्टी आदि से इलाज हो जाता है, किंतु जिह्वा के द्वारा (कटु वचनों से) किए घावों की रत्ती भर कोई औषधि नहीं।

दांम न होय उदास कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

दांम न होय उदास, मतलब गुण गाहक मिनख।.

ओखद रौ कड़वास, रोगी गिणै न राजिया॥.

daa.nm n hoy udaas, matlab gu.n gaahak minakh।.

okhad rau kaD़vaas, rogii gi.na.ai n raajiyaa||.

daa.nm n hoy udaas, matlab gu.n gaahak minakh।.

okhad rau kaD़vaas, rogii gi.na.ai n raajiyaa||.

गुणग्रहाक मनुष्य अपनी लक्ष्य-सिद्धि के लिए तन या धन की कठिनाई से कभी निराश नहीं होता, ठीक उसी प्रकार जैसे रोगी व्यक्ति औषध के कड़वेपन की परवाह नहीं करता।

मलियागिर मंझार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

मलियागिर मंझार, हर को तर चंनण हुवै।.

संगत लियै सुधार, रूखां ही नै राजिया॥.

maliyaagir ma.njhaar, har ko tar cha.nn.n huvai।.

sa.ngat liyai sudhaar, ruukhaa.n hii nai raajiyaa||.

maliyaagir ma.njhaar, har ko tar cha.nn.n huvai।.

sa.ngat liyai sudhaar, ruukhaa.n hii nai raajiyaa||.

मलयागिरि पर प्रत्येक पेड़ चंदन हो जाता है। यह अच्छी संगति का ही प्रभाव है, जो वृक्षों तक को सुधार देता है।

ऊँचै गिरवर आग कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

ऊँचै गिरवर आग, जलती सह देखै जगत।.

पर जळती निज पाग, रती न दीखै राजिया॥.

uu.nchai girvar aag, jaltii sah dekhai jagat।.

par jaLatii nij paag, ratii n diikhai raajiyaa||.

uu.nchai girvar aag, jaltii sah dekhai jagat।.

par jaLatii nij paag, ratii n diikhai raajiyaa||.

ऊँचे पहाड़ पर लगी आग को तो संसार देखता है, परंतु अपने सिर पर जलती हुई पगड़ी दिखाई नहीं देती। यानी दूसरों के दोष देखना आसान है, किंतु अपनी ग़लती किसी को नहीं दीखती।

तज मन सारी घात कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

तज मन सारी घात, इकतारी राखै इधक।.

वां मिनखां री बात, राम निभावै राजिया॥.

taj man saarii ghaat, iktaarii raakhai idhak।.

vaa.n minkhaa.n rii baat, raam nibhaavai raajiyaa||.

taj man saarii ghaat, iktaarii raakhai idhak।.

vaa.n minkhaa.n rii baat, raam nibhaavai raajiyaa||.

जो लोग अपने मन से समस्त कुटिलताएँ त्याग कर सदैव एक-सा आत्मीय व्यवहार करते हैं, उन भले मनुष्यों की बात भगवान निभाता है।

कुटळ निपट नाकार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

कुटळ निपट नाकार, नीच कपट छोडै नहीं।.

उतम करै उपकार, रूठा तूठा राजिया॥.

kuTL nipaT naakaar, niich kapaT chhoDai nahii.n।.

utam karai upkaar, ruuTha tuuTha raajiyaa||.

kuTL nipaT naakaar, niich kapaT chhoDai nahii.n।.

utam karai upkaar, ruuTha tuuTha raajiyaa||.

कुटिल और नीच व्यक्ति अपनी कुटिलता एवं नीचता कभी नहीं छोड़ सकते, जबकि हे राजिया! उत्तम कोटि के व्यक्ति चाहे रुष्ट हों अथवा तुष्ट, दूसरों का भला ही करेंगे।

मिळे सींह वन मांह कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

मिळे सींह वन मांह, किण मिरगां मृगपत कियौ।.

जोरावर अति जांह, रहै उरध गत राजिया॥.

miLa.e sii.nh van maa.nh, ki.n mirgaa.n mrigapat kiyau।.

joraavar ati jaa.nh, rahai uradh gat raajiyaa||.

miLa.e sii.nh van maa.nh, ki.n mirgaa.n mrigapat kiyau।.

joraavar ati jaa.nh, rahai uradh gat raajiyaa||.

सिंह को वन में किन मृगों ने मृगपति घोषित किया था। जो शक्तिशाली होता है, उसकी ऊर्ध्वगति स्वतः हो जाती है।

कारण कटक न कीध कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

कारण कटक न कींध, सखरा चाहीजै सुपह।.

लंक विकट गढ लींध, रींछ बांदरां राजिया॥.

kaara.n kaTak n kii.ndh, sakhra chaahiijai supah।.

la.nk vikaT gaDh lii.ndh, rii.nchh baa.ndraa.n raajiyaa||.

kaara.n kaTak n kii.ndh, sakhra chaahiijai supah।.

la.nk vikaT gaDh lii.ndh, rii.nchh baa.ndraa.n raajiyaa||.

युद्ध में विजय के लिए बड़ी सेना की अपेक्षा कुशल नेतृत्व ही मुख्य कारण होता है। श्रेष्ठ नेतृत्व के कारण ही लंका जैसे अजेय दुर्ग को रींछ और वानरों ने जीत लिया था।

खळ गुळ अण खूं ताय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

खळ गुळ अण खूंताय, एक भाव कर आदरै।.

ते नगरी हूंताय, रोही आछी राजिया॥.

khaL guL a.n khuu.ntaay, ek bhaav kar aadarai।.

te nagrii huu.ntaay, rohii aachhii raajiyaa||.

khaL guL a.n khuu.ntaay, ek bhaav kar aadarai।.

te nagrii huu.ntaay, rohii aachhii raajiyaa||.

जहाँ खली एवं गुड़ दोनों का एक ही मूल्य हो और गुण-अवगुण के आधार पर निर्णय न होता हो, उस नगरी से तो निर्जन जंगल ही अच्छा है।

एक जतन सत एह कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

एक जतन सत एह, कूकर कुगँध कुमांणसां।.

छेड़ न लीजे छेह, रैवण दीजे राजिया॥.

ek jatan sat eh, kuukar kuga.ndh kumaa.n.nasaa.n।.

chheD n liije chheh, raiva.n diije raajiyaa||.

ek jatan sat eh, kuukar kuga.ndh kumaa.n.nasaa.n।.

chheD n liije chheh, raiva.n diije raajiyaa||.

कुत्ता, दुर्गंध और दुष्टजन से बचने का एकमात्र उत्तम उपाय यही है कि उन्हें छेड़ा नहीं जाय और ज्यौं का त्यौं पड़ा रहने दिया जाय।

गह भरियौ गजराज कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

गह भरियौ गजराज, मह पर वह आपह मतै।.

कूकरिया बेकाज, रुगड भुसै किम राजिया॥.

gah bhariyau gajraaj, mah par vah aapah matai।.

kuukariya bekaaj, rugaD bhusai kim raajiyaa||.

gah bhariyau gajraaj, mah par vah aapah matai।.

kuukariya bekaaj, rugaD bhusai kim raajiyaa||.

मस्त गजराज तो अपनी मर्ज़ी से पृथ्वी पर विचरण करता है, किंतु ये मूर्ख कुत्ते व्यर्थ ही उसे देख कर क्यों भौंकते हैं?

पढबो वेद पुरांण कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

पढबो वेद पुरांण, सोरौ इण संसार में।.

बातां तणौ विनांण, रहस दुहेलौ राजिया॥.

paDhbo ved puraa.n.n, sorau i.n sa.nsaar me.n।.

baataa.n ta.na.au vinaa.n.n, rahas duhelau raajiyaa||.

paDhbo ved puraa.n.n, sorau i.n sa.nsaar me.n।.

baataa.n ta.na.au vinaa.n.n, rahas duhelau raajiyaa||.

इस संसार में वेद-पुरण आदि शास्त्रों को पढ़ना तो आसान है, किंतु, हे राजिया! बात करने की विशिष्ट विद्या का रहस्य सीखना-समझना बहुत कठिन है।

चुगली ही सूं चून कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

चुगली ही सूं चून, और न गुण इण वासतै।.

खोस लिया बेखून, रिगल उठावे राजिया॥.

chuglii hii suu.n chuun, aur n gu.n i.n vaasatai।.

khos liya bekhuun, rigal uThaave raajiyaa||.

chuglii hii suu.n chuun, aur n gu.n i.n vaasatai।.

khos liya bekhuun, rigal uThaave raajiyaa||.

जिन लोगों के पास चुगली करने के अतिरिक्त जीविकोपार्जन का अन्य कोई गुण नहीं होता, ऐसे लोग ठिठोलियाँ करते-करते ही निरपराध लोगों की रोज़ी-रोटी छीन लेते हैं।

दूध नीर मिळ दोय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

दूध नीर मिळ दोय, हेक जिसी आक्रित हुव।.

करै न न्यारौ कोय, राजहंस बिन राजिया॥.

duudh niir miL doy, hek jisii aakrit huv।.

karai n nyaarau koy, raajaha.ns bin raajiyaa||.

duudh niir miL doy, hek jisii aakrit huv।.

karai n nyaarau koy, raajaha.ns bin raajiyaa||.

दूध और पानी मिलने से दोनों की आकृति एक समान हो जाती है। फिर उनको अलग करने अर्थात् दूध का दूध और पानी का पानी करने (नीर-क्षीर-विवेक) की क्षमता तो राजहंस के अतिरिक्त अन्य किसी में भी नहीं होती।

पय मीठा कर पाक कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

पय मीठा कर पाक, जो इमरत सींचीजिये।.

उर कड़वाई आक, रंच न मूकै राजिया॥.

pay miiTha kar paak, jo imrat sii.nchiijiye।.

ur kaD़vaa.ii aak, ra.nch n muukai raajiyaa||.

pay miiTha kar paak, jo imrat sii.nchiijiye।.

ur kaD़vaa.ii aak, ra.nch n muukai raajiyaa||.

आक को भले ही मीठे दूध अथवा अमृत से ही सींचा जाय, किंतु वह अपने अंदर का कड़वापन किंचित् भी नहीं छोड़ता। (इसी प्रकार चाहे कितना ही मधुर बर्ताव किया जाय, कुटिल व्यक्ति अपनी कुटिलता नहीं छोड़ेगा।)

इणही सूं अवदात कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

इणही सूं अवदात, कहणी सोच विचार कर।.

वे मौसर री बात, रूड़ी लग न राजिया॥.

i.nahii suu.n avdaat, kah.na.ii soch vichaar kar।.

ve mausar rii baat, ruuDii lag n raajiyaa||.

i.nahii suu.n avdaat, kah.na.ii soch vichaar kar।.

ve mausar rii baat, ruuDii lag n raajiyaa||.

सोच-समझ कर कही जाने वाली बात ही हितकारिणी होती है, क्योंकि बिना मौके कही गई बात किसी को भी अच्छी नहीं लगती।

औगुणगारा और कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

औगुणगारा और, दुखदाई सारी दुनी।.

चोदू चाकर चोर, रांधै छाती राजिया॥.

augu.nagaara aur, dukhdaa.ii saarii dunii।.

choduu chaakar chor, raa.ndhai chhaatii raajiyaa||.

augu.nagaara aur, dukhdaa.ii saarii dunii।.

choduu chaakar chor, raa.ndhai chhaatii raajiyaa||.

जो सेवक दब्बू और चोर हो, उसके अनुसार तो अन्य लोग ही बुरे हैं और सारी दुनिया दु:ख देने वाली है। ऐसा सेवक तो सदैव अपने स्वामी का जी जलाता रहता है।

गुणी सपत सुर गाय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

गुणी सपत सुर गाय, कियौ किसब मूरख कनै।.

जांणै रूनौ जाय, रन रोही में राजिया॥.

gu.na.ii sapat sur gaay, kiyau kisab muurakh kanai।.

jaa.n.na.ai ruunau jaay, ran rohii me.n raajiyaa||.

gu.na.ii sapat sur gaay, kiyau kisab muurakh kanai।.

jaa.n.na.ai ruunau jaay, ran rohii me.n raajiyaa||.

गायक ने संगीत के सातों स्वरों में गाकर मूर्ख व्यक्ति के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया, किंतु उसे ऐसा लगा, मानो वह सूने जंगल में जाकर रोया हो। अर्थात् अ-रसिक एवं गुणहीन व्यक्ति के सम्मुख कलात्मक प्रदर्शन अरण्यरोदन के समान होता है।

जिण बिन रयौ न जाय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

जिण बिन रयौ न जाय, हेक घड़ी अळगौ हुवां।.

दोस करै बिण दाय, रीस न कीजे राजिया॥.

ji.n bin rayau n jaay, hek ghaDii aLagau huvaa.n।.

dos karai bi.n daay, riis n kiije raajiyaa||.

ji.n bin rayau n jaay, hek ghaDii aLagau huvaa.n।.

dos karai bi.n daay, riis n kiije raajiyaa||.

जिस व्यक्ति के घड़ी भर अलग होने पर भी रहा नहीं जाए, ऐसा ममत्व वाला व्यक्ति यदि कोई ग़लती भी करे, तो उसका बुरा नहीं मानना चाहिए।

सब देखै संसार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

सब देखै संसार, निपट करै गाहक निजर।.

जांणै जांणणहार, रतनां पारख राजिया॥.

sab dekhai sa.nsaar, nipaT karai gaahak nijar।.

jaa.n.na.ai jaa.n.na.nahaar, ratnaa.n paarakh raajiyaa||.

sab dekhai sa.nsaar, nipaT karai gaahak nijar।.

jaa.n.na.ai jaa.n.na.nahaar, ratnaa.n paarakh raajiyaa||.

यों तो सभी लोग ग्राहक की नज़र से वस्तुओं को देखते ही हैं, किंतु उनके गुण-दोष की सही पहचान प्रत्येक व्यक्ति नहीं कर सकता। रत्नों की परख तो केवल जौहरी ही जानता है।

गुण अवगुण जिण गांव कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

गुण अवगुण जिण गांव, सुणै न कोई सांभळै।.

उण नगरी विच नांव, रोही आछी राजिया॥.

gu.n avgu.n ji.n gaa.nv, su.na.ai n ko.ii saa.mbhLa.ai।.

u.n nagrii vich naa.nv, rohii aachhii raajiyaa||.

gu.n avgu.n ji.n gaa.nv, su.na.ai n ko.ii saa.mbhLa.ai।.

u.n nagrii vich naa.nv, rohii aachhii raajiyaa||.

जहाँ गुण और अवगुण का न तो भेद हो और न कोई भेद करने वाला हो, ऐसी नगरी से तो निर्जन-वन ही अच्छा।

आवै नहीं इलोळ कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

आवै नहीं इलोळ, बोलण चालण री विवध।.

टीटोड़्यां रा टोळ, राजहंस री राजिया॥.

aavai nahii.n iloL, bola.n chaala.n rii vivadh।.

TiiToDyaa.n ra ToL, raajaha.ns rii raajiyaa||.

aavai nahii.n iloL, bola.n chaala.n rii vivadh।.

TiiToDyaa.n ra ToL, raajaha.ns rii raajiyaa||.

महान व्यक्तियों के साथ रहने मात्र से ही साधारण व्यक्तियों में उनकी महानता नहीं आ सकती। जैसे राजहंसों का संसर्ग पाकर भी टिटहरियों का झुंड हंसों की-सी बोलचाल नहीं सीख पाता।

चावल जितरी चोट कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

चावल जितरी चोट, कोई अति सावळ कहै।.

खोटै मन री खोट, रहै चिमकती राजिया॥.

chaaval jitrii choT, ko.ii ati saavaL kahai।.

khoTai man rii khoT, rahai chimaktii raajiyaa||.

chaaval jitrii choT, ko.ii ati saavaL kahai।.

khoTai man rii khoT, rahai chimaktii raajiyaa||.

कोई व्यक्ति भले ही सहज भाव से क्यों न कहे, परंतु हे राजिया! दुष्ट के मन में छिपे हुए खोट पर यदि ज़रा-सी चोट पहुँचती है, तो वह चौंकने लगता है। (अपराधी मन सदैव आशंकित रहता है।)

मद विद्या धन मांन कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

मद विद्या धन मांन, ओछा सो उकलै अवट।.

आधण रै उनमांन, रहैक विरला राजिया॥.

mad vidya dhan maa.nn, ochha so uklai avaT।.

aadha.n rai unmaa.nn, rahaik virla raajiyaa||.

mad vidya dhan maa.nn, ochha so uklai avaT।.

aadha.n rai unmaa.nn, rahaik virla raajiyaa||.

विद्या, धन और प्रतिष्ठा पाकर ओछे आदमी अभिमान में उछलने लगते हैं। आदहन (खिचड़ी आदि पकाने के लिए आग पर चढ़ा कर गर्म किया हुआ पानी) की भांति मर्यादा में यथावत् रहने वाले लोग तो विरले ही होते है।

हुवै न बूझणहार कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

हुवै न बूझणहार, जांणै कुण कीमत जठै।.

बिन ग्राहक व्यौपार, रुल्यौ गिणीजै राजिया॥.

huvai n buujha.nahaar, jaa.n.na.ai ku.n kiimat jaThai।.

bin graahak vyaupaar, rulyau gi.na.iijai raajiyaa||.

huvai n buujha.nahaar, jaa.n.na.ai ku.n kiimat jaThai।.

bin graahak vyaupaar, rulyau gi.na.iijai raajiyaa||.

जहाँ किसी को कोई पूछने वाला भी नहीं मिलेगा तो वहाँ उसके गुण का महत्व कौन समझेगा। यह सच है कि बिना ग्राहक के व्यापार ठप्प हो जाता है। गुण और गुणग्राहक दोनों से ही वस्तु की सार्थकता होती है।

हियै मूढ जो होय कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

हियै मूढ जो होय, कौ संगत ज्यांरी करै।.

काळा ऊपर कोय, रंग न लागै राजिया॥.

hiyai muuDh jo hoy, kau sa.ngat jyaa.nrii karai।.

kaaLa.a uupar koy, ra.ng n laagai raajiyaa||.

hiyai muuDh jo hoy, kau sa.ngat jyaa.nrii karai।.

kaaLa.a uupar koy, ra.ng n laagai raajiyaa||.

जो व्यक्ति जन्मजात मूर्ख होते हैं, उन पर सत्संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जैसे काले रंग पर अन्य कोई रंग नहीं चढ़ता।

भाड जोख झक भेक कृपाराम बारहठ- खिड़िया का सोरठा  Kriparam Khidiya Sarothaa

भाड जोख झक भेक, वारज में भेळा बसै।.

इसकी भंवरौ एक, रस की जांणै राजिया॥.

bhaaD jokh jhak bhek, vaaraj me.n bheLa.a basai।.

iskii bha.nvrau ek, ras kii jaa.n.na.ai raajiyaa||.

bhaaD jokh jhak bhek, vaaraj me.n bheLa.a basai।.

iskii bha.nvrau ek, ras kii jaa.n.na.ai raajiyaa||.

बड़ा मेंढक, जोंक, मछली और दादुर सभी जल में कमल के अंदर ही रहते हैं, किंतु कमल के रस का महत्व तो केवल रसिक भ्रमर ही जानता है।


Kriparam Khidiya Parichay कृपाराम खिड़िया परिचय 

कृपाराम खिड़िया राजस्थानी कवि एवं नीतिकार थे। उन्होने 'राजिया रा दूहा' नामक नीतिग्रन्थ की रचना की। वे राव राजा देवी सिंह के समय में हुए थे।

कवि कृपाराम जी तत्कालीन मारवाड़ राज्य के खराडी गांव के निवासी खिडिया शाखा के चारण जाति के जगराम जी के पुत्र थे। वे राजस्थान में शेखावाटी क्षेत्र में सीकर के राव राजा देवीसिंह के दरबार में रहते थे। पिता जगराम जी को नागौर के कुचामण के शासक ठाकुर जालिम सिंह जी ने जुसरी गांव की जागीर प्रदान की थी। वहीं इस विद्वान कवि का जन्म हुआ था। राजस्थानी भाषा, डिंगल और पिंगल के उतम कवि व अच्छे संस्कृज्ञ होने नाते उनकी विद्वता और गुणों से प्रभावित हो सीकर के राव राजा लक्ष्मण सिंह जी ने महाराजपुर और लछमनपुरा गांव इन्हे वि.स, 1847 और 1858 में जागीर में दिए थे।

Kriparam Khidiya Saurathaa


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