घी पिलाने का गीत / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Ghee Pilane Ka Geet Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

घी पी मारा आछ्या लाडा घी पी, जयू थारी दाद्या पावे,
डोर हलावे, हमसे रलिया राड़ करे, मंजीरा बाजे,
बरभू बाजे, भेणया शब्द सुणाय, पाड़ोसन मंगल गावसी,
बड़े द्वारा बाज्या जंगी ढोल लाखीणा लाड़ा घी पीवो,
बागां में उतर थारी जान, लाखीणा लाडा घी पीवो।
घी पी मारा आछ्या लाडा घी पी, जयू थारी मायां पावे,
डोर हलावे, हमसे रलिया राड़ करे, मंजीरा बाजे,
बरजू बाजे, भेणया शब्द सुणाय, पाड़ोसन मंगल गावसी।
घी पी मारा आछ्या लाडा घी पी, ज्यू थारी ताइयां-काकियां पावे,
डोर हलावे, हमसे रलिया राड़ करे, मंजीरा बाजे,
बरभू बाजे, भेणया शब्द सुणाय, पाड़ोसन मंगल गावसी।
घी पी मारा आछ्या लाडा घी पी, ज्यू थारी भूवा-बहणा पावे,
डोर हलावे, हमसे रलिया राड़ करे, मंजीरा बाजे,
बरभ बाजे, भेणया शब्द सुणाय, पाड़ोसन मंगल गावसी।
घी पी मारा आछ्या लाडा घी पी, ज्यू थारी नानियां -मामियां पावे,
डोर हलावे, हमसे रलिया राड़ करे, मंजीरा बाजे,
बरभू बाजे, भेणया शब्द सुणाय, पाड़ोसन मंगल गावसी।

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