बन्ना नहाने का गीत / 2 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Banna Nahane Ka Geet 2 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

खेल खेल नदी बहैव, शहजादो लाडो मल मल न्हावै जी।
बन्नो पूछ पढ़ायो म्हारी बन्नी ने, तू हार पहनै जीव न्हावै जी।
हार सौहे लो म्हारे गला ऊपर, मोतीड़ा दीप ये जीलाड़ी जी।
कौन जी रो रतन कटोरी, कौन जी रा मोतीड़ो रो हारजी।
लोनी है म्हे रतन कटोरी, बदल्यो हे मोती रो हार जी। 

बन्ना नहाने का गीत / 1 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Banna Nahane Ka Geet 1 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics


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