बिंदायक जी के गीत / 3 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Bindayak Ji Ke Geet 3 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

म्हारे गोबर पीली रुल मिले बीच घाली पांडु री रेखा।
सिंघ चढ़ हो बिंदायक बिदधड़ी।
म्हारे चांदी सोना रूल मिले बीच घालो म्होरां री रेखा।
सिंघ चढ़ हो बिंदायक बिरधड़ी।
म्हारे मोतीजी मूंगा रूल मिले घालो लालांरी रेखा।
सिंघ चढ़ हो बिंदायक बिरधड़ी।
म्हारे कांसीजी पीतल रूल मिले बीच घालो तांबा री रेखा।
सिंघ चढ़ हो बिंदायक बिरधड़ी।
म्हारे काजल टीकी रूल मिले बीच घालो हिंगलू री रेखा।
सिंघ चढ़ हो बिंदायक बिरधड़ी।
म्हारे सूरज चंद्रमाजी रूल मिले बीच म्हारे बाई सोदरा।
सिंघ चढ़ हो बिंदायक बिरधड़ी।

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