आ जा रे परदेसी / Aa Ja Re Pardesi

 आ जा रे परदेसी


मैं तो कब से खड़ी इस पार


ये अँखियाँ थक गईं पंथ निहार


आ जा रे परदेसी


मैं दिये की ऎसी बाती


जल न सकी जो, बुझ भी न पाती


आ मिल मेरे जीवन साथी


आ जा रे परदेसी


तुम संग जनम-जनम के फेरे


भूल गए क्यों साजन मेरे


तड़पत हूँ मैं सांझ-सबेरे


आ जा रे परदेसी


मैं नदिया, फ़िर भी मैं प्यासी


भेद ये गहरा, बात ज़रा-सी


बिन तेरे हर साँस उदासी


आ जा रे परदेसी


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