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हिंदी लोक गीत बन्ना-बन्नी लिरिक्स | Hindi Lok Geet Banna-Banni Lyrics

1. अपना बन्ना फूल गुलाबी, बन्नो चम्पे की कली अपना बन्ना फूल गुलाबी, बन्नो चम्पे की कली इनकी मनोहर जोड़ी लागे कितनी भली अपना बन्ना फूल गुलाबी, बन्नो चम्पे की कली बहना के घर में ये पहली ख़ुशी है पहली ख़ुशी बड़ी देर से मिली है सपना पूरा हुआ, मन की आशा फली इनकी मनोहर जोड़ी लागे कितनी भली अपना बन्ना फूल गुलाबी, बन्नो चम्पे की कली दिन रंग भरे आएँगे, होगी हर रात दिवाली संग ले के चली अपने घर, अब दिया जलाने वाली प्यारे भैया ने पाई दुल्हन साँचे में ढली इनकी मनोहर जोड़ी लागे कितनी भली अपना बन्ना फूल गुलाबी, बन्नो चम्पे की कली 2. आज अँगन मेरा सूना, बन्नी तो मेरी पाहुनियाँ आज अँगन मेरा सूना, बन्नी तो मेरी पाहुनियाँ -२ उसकी दादी ने ऐसा पाला कि ऐसा पाला कि नैन बिच पूतरिया उसके बाबा ने ऐसा निकाला कि ऐसा निकाला कि जल बिन माछरिया आज अँगन मेरा सूना, बन्नी तो मेरी पाहुनियाँ -२ उसकी ताई ने ऐसा पाला कि ऐसा पाला कि नैन बिच पूतरिया उसके ताऊ ने ऐसा निकाला कि ऐसा निकाला कि जल बिन माछरिया आज अँगन मेरा सूना, बन्नी तो मेरी पाहुनियाँ -२ उसकी मम्मी ने ऐसा पाला कि ऐसा पाला कि नैन बिच पूतरिया ...

एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के गीत NCERT Ke Geet

अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ! हरिवंशराय बच्चन वृक्ष हों भलें खड़े, हों घने, हों बड़ें, एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! तू न थकेगा कभी! तू न थमेगा कभी! तू न मुड़ेगा कभी!—कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! यह महान दृश्य है— चल रहा मनुष्य है अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, लथपथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! स्रोत : पुस्तक : बच्चन के लोकप्रिय गीत (पृष्ठ 43) रचनाकार : हरिवंशराय बच्चन प्रकाशन : हिंद पॉकेट बुक्स संस्करण : 2004 एक गीत (दिन जल्दी-जल्दी ढलता है हरिवंशराय बच्चन प्रस्तुत पाठ एनसीईआरटी की कक्षा बारहवीं के पाठ्यक्रम में शामिल है। हो जाए न पथ में रात कहीं, मंज़िल भी तो है दूर नहीं— यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है! दिन जल्दी-जल्दी ढलता है! बच्चे प्रत्याशा में होंगे, नीड़ों से झाँक रहे होंगे— यह ध्यान परों में चिड़िया के भरता कितनी चंचलता है! दिन जल्दी-जल्दी ढलता है! मुझसे मिलने को कौन विकल? मैं होऊँ किसके हित चंचल? यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विह्लता है! दिन जल्दी-जल्दी ढलता है! कर चले हम फ़िदा कैफ़ी आज़...

एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के नाटक | NCERT ALL Plays Natak in Hindi

चावल की रोटियाँ | पी.औंग खिन  प्रस्तुत पाठ एनसीईआरटी की कक्षा पाँचवी के पाठ्यक्रम में शामिल है। पात्र-परिचय कोको : आठ साल का एक बर्मी लड़का, कुछ मोटा नीनी : नौ साल का बर्मी लड़का, कोको का दोस्त तिन सू : आठ साल का बर्मी लड़का, कोको का दोस्त मिमि : सात साल की बर्मी लड़की, कोको की दोस्त उ बा तुन : जनता की दुकान का प्रबंधक (इसका अभिनय कोई लंबे कद का लड़का नकली मूँछें और चश्मा लगाकर कर सकता है) (एक सादा कमरा, दीवारों पर बाँस की चटाइयाँ। एक दीवार के सहारे रखी अलमारी। अलमारी के ऊपर एक रेडियो, चाय की केतली, कुछ कप और ख़ाली गुलाबी फूलदान रखा है। कमरे के बीच फ़र्श पर एक चटाई बिछी है जिसके ऊपर कम ऊँचाई वाली गोल मेज़ रखी है। दो दरवाज़े। एक दरवाज़ा पीछे की ओर खुलता है और दूसरा एक किनारे की ओर। पंछियों के चहचहाने के साथ-साथ पर्दा उठता है। दूर कहीं मुर्ग़ा बाँग देता है। कुत्ता भौंकता है। कहीं प्रार्थना की घंटियाँ बजती हैं। को को आता है, जँभाई लेकर अपने को सीधा करता है।) कोको —माता-पिता धान लगाने खेतों में चले गए हैं। जब तक माँ खाना बनाने के लिए लौटकर नहीं आती। मुझे घर की देखभाल करनी है। हूँ....