वे रघुवर को जानत मन की संत जूड़ीराम भजन / Ve Raghubar Ko Jaanat Man Ki Sant Joodiram Bhajan

 

वे रघुवर को जानत मन की।
जानत हैं रघुवीर कृपा निधि प्रीति प्रतीति देख निज जन की।
ऐसी प्रीति रीति के कारण पावन करी भीलनी वन की।
पीपा की परतीत बड़ाई गई भक्त सुगति भई तिन की।
राना जिहर दियो मीरा को नाम प्रताप ताप गई तन की।
कहत पुकार-पुकार दीन हों नाम लेत तर गई गनका सी।
ऐसों प्रबल काल नहिं दीसत सीमाराम भजन रति तिन की।
प्रनत पाल करनानिधान हर पल-पल खबर करत दासन की।
जूड़ीराम गरीब निबाजो भारी तपन बुझावत तन की।

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