श्री सद्गुरु छेकै सुख के सागर /Shri Sadguru Chekai Sukh Ke Sagar, Ramdhari Singh 'Kavyatirth'

 

श्री सदगुरू छेकै सुख के सागर
करोॅ हमरोॅ उपकार परभु
हमरोॅ जेसनों परानी
पैलकै चरणों में आधार परभु।

जनम-जनम सेॅ हमरा मन में
अज्ञान तम तेॅ भरपूर छेलै
गियान के जोति दै केॅ तोहंे
दूर करल्हेॅ अंधकार परभु।

जीवन नैया भवसागरोॅ में
किनारा नजर नै आवै छै
तोंही बचैल्हेॅ जीवन नैय्या
सुनी केॅ हमरोॅ पुकार परभु।

माया के अटूट जाल सें
तोंही तेॅ हमरा उबारनें छोॅ
सौंसे संसार यहेॅ कहै छै
तोंही छोॅ तारणहार परभु।

दीन भगत के सिरोॅ पर सदगुरू
दया के हाथ सदा रखियोॅ
तोंही सच्चा हितैषी जगत में
तोंही छोॅ गमख्वार परभु। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ