सतगुरु ऐलै द्वार, जागलै सुभाग हे छोटेलाल दास भजन / Satguru Ailai Dwaar, Chhote Lal Das Bhajan

 

सतगुरु ऐलै द्वार, जागलै सुभाग हे।
सब सखी गुरु-पद, करो अनुराग हे॥टेक॥
सहज-सरल बनो, कपट के त्याग हे।
सबटा गुमान तजो, करो भक्ति माँग हे॥1॥
गुरु-ओर लागो तोड़ि, ममता के धाग हे।
गुरु-सेव करि नित, मेटो मन-दाग हे॥2॥
दोष-पाप छोड़ो सब, शुचि कर्म राग हे।
गुरु-जाप-ध्यान करो, मारो मन-नाग हे॥3॥
बिन्दु-ध्यान दृढ़ करो, निसिदिन जाग हे।
‘लाल दास’ भव तरो, शब्द-ध्यान पाग हे॥4॥ 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है