राम बिन भाव करम नहिं छूटै धरनीदास भजन / Ram Bin Bhav Karam Nahin Chhootai Dharanidas Bhajan

 

राम बिन भाव करम नहिं छूटै।
साथ संग औ राम भजन बिन, काल निरंतर लूटै।
मल सेती जो मलको धोवै, सो मल कैसे छूटै।
प्रेम का साबुन नाम का पानी, दीय मिल तांता टूँटै।
भेद अभेद भरम का भांडा, चौड़े पड़ पड़ फूटै।
गुरू मुख सब्द गहै उर अंतर, सकल भरम से छूटै।
राम का ध्यान तु धर रे प्रानी, अमृत का मेंह बूटै।
जन दरियाव अरप दे आपा, जरामन तब टूटै। 

प्रभुजी तोकह लाज हमारी धरनीदास भजन / Bhajan Prabhuji Tokah Laaj Hamari Dharanidas Bhajan


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