राग मालश्री १ निर्वाणानन्द भजन / Raag Malashree 1 Nirvananand Bhajan

 

जये देवी भैरवी गोरखनाथ दरसन दे हो भवानीये ।।
प्रथम देवीके उत्पन्न भैइ जनम भै ये कैलासय ।।
जोती जगमग चै हुँ वर देवीके चौसठी जोगीनी माईकरे ।।जये.।।१।।
सपना देषत गोरखनाथ भैषी देवी भनाईथे ।।
वीसासये भोग प्रसन्न देवी के वर दोये सब देसये ।।जये.।।२।।
देव वरन वर्दान पाईये सरुप नेपालमा रुप भये ।।
षाट सिंहासन जती लीजे सेव देसय ।।जये.।।३।।
देव औरनमाथ मकुड वदन सुर्जे उदाईये ।।
तपस्या जीती सरुप प्रगट तषत नेपालमा रुप भये ।।जये.।।४।।
सोरसी भीत मुकुट झलमल कुन्डल झलकतो कान ये
देव वरण श्रीरणबहादुर शाहा देव जस पाइये ।।जये.।।५।। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ