कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी बिन्दु जी भजन

  Kripa Ki Na Hoti Jo AadatTumhari Bindu Ji Bhajan  

कृपा की न होती जो आदत तुम्हारी।
तो सूनी ही रहती अदालत तुम्हारी।
ओ दोनों के दिल में जगह तुम न पाते।
तो किस दिल में होती हिफाजत तुम्हारी।
ग़रीबों की दुनिया है आबाद तुमसे।
ग़रीबों से है बादशाहत तुम्हारी।
न मुल्जिम ही होते न तुम होते हाकिम।
न घर-घर में होती इबादत तुम्हारी।
तुम्हारी उल्फ़त के दृग ‘बिन्दु’ हैं वे।
तुम्हें सौंपते है अमानत तुम्हारी। 

Comments

Popular posts from this blog

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ