खेलत गगन ज्ञान मतवाला संत जूड़ीराम भजन / Khelat Gagan Gyaan Matwala Sant Judiram Bhajan

 

खेलत गगन ज्ञान मतवाला।
अधर अनूप पुरुष को डेरा है भरपूर अजब रंग शाला।
त्रिखूटी जोत निरंजन दीखे सोई गुण गावत वेद रसाला।
पूरनधाम नाम जिन चीनो निस दिन पियत अमी रस प्याला।
जूड़ीराम नाम के सुमरे व्यापत नहीं जगत के जाला।


Comments

Popular posts from this blog

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ