कौने देलकै काठो के कंठी धनी धरमदास भजन / Kaune Delkai Katho Ke Kanthi Dhani Dharmdas Bhajan

 

॥मंगल॥

कौने देलकै काठो के कंठी, कौने देलकै तिलकवो रे जान।
जान, कौने गुरु खोलल दसमी दुअरियो रे जान॥1॥
गुरु देलकै काठो के कंठी, सतगुरु देलकै तिलकवो रे जान।
जान, भेदी गुरु खोलल दसमी दुअरियो रे जान॥2॥
त्रिकुटी महल चढ़ी देखो दसो दिशा इँजोरियो रे जान।
जान, वही में देखो सतगुरु के सुरतियो रे जान॥3॥
रंग-बिरंग के बाजा बाजै, रंग-बिरंग फुलवाड़ियो रे जान।
जान, वही में घूमे सतगुरु मलिकवो रे जान॥4॥
गुरु मोरा हद-हद कैलकै, छन-छन अनहद सुनैलकै रे जान।
जान, वही रे बाजे मुरली बँसुरियो रे जान॥5॥
मुरली के शब्द सुनी सालै मोर कलेजवो रे जान।
जान,नाचै रे लागलै सुरति सुहागिन रे जान॥6॥
धर्मदास सतगुरु से कइलै अरजियो रे जान,
जान, गुरु गोविन्द सतलोक देखैलकै रे जान॥7॥

सुतली मैं रहली अपना धनी धरमदास भजन / Sutli Main Rahli Apna Dhani Dharamdas Bhajan

 

Comments

Popular posts from this blog

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ