कनक-भूधर-शिखर-बासिनी / Kanak-bhudar-shikhar-baasini Vidyapati

कनक-भूधर-शिखर-बासिनी
चंद्रिका-चय-चारु-हासिनि
दशन-कोटि-विकास-बंकिम-
तुलित-चंद्रकले ।।

क्रुद्ध-सुररिपु-बलनिपातिनि
महिष- शुम्भ-निशुम्भघातिनि
भीत-भक्त-भयापनोदन –
पाटव -प्रबले।।

जे देवि दुर्गे दुरिततारिणि
दुर्गामारी – विमर्द -कारिणि
भक्ति – नम्र – सुरासुराधिप –
मंगलप्रवरे ।।

गगन – मंडल – गर्भगाहिनि
समर – भूमिषु – सिंहवाहिनि
परशु – पाश – कृपाण – सायक –
संख -चक्र-धरे ।।

अष्ट – भैरवी – सँग – शालिनी
स्वकर – कृत – कपाल- मालिनि
दनुज – शोणित -पिशित – वर्द्धित-
पारणा-रभसे।।

संसारबन्ध – निदानमोचिनी
चन्द्र – भानु – कृशानु – लोचनि
योगिनी – गण – गीत – शोभित –
नित्यभूमि – रसे ।।

जगति पालन – जन्म – मारण –
रूप – कार्य – सहस्त्र – कारण –
हरी – विरंचि – महेश – शेखर –
चुम्ब्यमान – पड़े। ।

सकल – पापकला – परिच्युति-
सुकवि – विद्यापति – कृतस्तुति
तोषिते – शिवसिंह – भूपति –
कामना – फलदे।।

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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