गुरु पद लाग जगो मन मेरे संत जूड़ीराम भजन / Guru Pad Laag Jago Man MereSant Judiram Bhajan

 

गुरु पद लाग जगो मन मेरे।
नाम अखंड धाम पर पूरन दियो लखाय परम गत पेरे।
दुख दालिद्र भगाय पलक छिन में मेटे सकल अंधेरे।
जोग जुक्त कर मुक्त लखाई जान अनाथ नाथ तब हेरे।
जूड़ीराम सरन सतगुरु के देव भक्त पर दान घनेरे।


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