गुरु हो गेलों चारो धाम /Guru Ho Gelon Charo Dham, Ramdhari Singh Kavyatirth

 

गुरू हो, गेलों चारो धाम हरिनाम जानेॅ जी।
धाम गेलों, दंडवत कइलों, दान देलों जी।
ओम बोलोॅ, हरि बोलो, शिव बोलोॅ जी।
यहेॅ नाम जपोॅ तोहें मुक्ति मिल्तहौं जी।
ई नाम सुनी हमरा शंका भेलै जी।
गूंगा कैसें कहतै ओम शिव हरि जी।
वहाँ से निराश हम्में हो गेलियै जी।
सत्संग सुनेॅ हम्में गेलियै आरो गुरू जी।
वहूँ नाम नहियें भेटलै जे गूंगा बोलेॅ जी।
तोरोॅ नाम सुनी हम्में शरण अइलों जी।
पैलों नाम, सफल होलोॅ जीवन हमरोॅ जी।
शरण गहोॅ ‘सतपाल’ जी के भवरोग छुटत्हौं जी। 




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