भारी मर्म शर्म न टूटै संत जूड़ीराम भजन / Bhari Marm Sharm Na Tutai Sant Judiram Bhajan

 

भारी मर्म शर्म न टूटै।
शर्म साद गुरु के सनमुख कर ओंगन आठ पहर दिन लूटै।
चौहट हाट घाट वन भूलों लागी जिकर फिकर नहिं छूटै।
स्वारथ सदा समारथ मन के माया मोह गुस्ट नहीं फूटै।
दुरलभ देह गमाय भजन बिन जूड़ी चेत कालजम कूटै।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है