जो सुक सकी पीव अपने में संत जूड़ीराम भजन / Jo Suk Saki Peev Apne Mein Sant Judiram Bhajan

 

जो सुक सकी पीव अपने में।
तज विभिचार विचार समझ कर सुरत समार नाम जपने में।
है अहिवात राज पिय के संग जो तन जात रैन सपने में।
जलन जाय तन ताप दूर कर भयो सुहाग शबद रचने में।
जूड़ीराम प्रीत प्रीतम सों निर्त किया तव क्या कपने में।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ