जागो नहीं जाग जल भारी संत जूड़ीराम भजन / Bhajan Jago Nahin Jag Jal Bhari Sant Judiram Bhajan

 

जागो नहीं जाग जल भारी।
बहुतक दंद-फंद तुमें सूझे काल कर्म की राह संभारी।
अब कह जाब राव किहि के ढिंग बिन दीपक नहि मिटे अंधयारी।
तिर नहीं रहो बहौ भौसागर हेरे नहि हर राम निहारी।
बंधन परो रहो अपने विधि भेद बिना भम्र सके न हारी।
जुड़ीराम शब्द बिन चीन्हें बे सतसंग न जीव सुखारी।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है