बिन हर नाम हृदय अंधियारी संत जूड़ीराम भजन / Bin Har Naam Hriday Andhyari Sant Judiram Bhajan

 

बिन हर नाम हृदय अंधियारी।
सुरझत नाहिं समझ बिन भूलो मोह अधम भ्रम भारी।
जप तप जोग समाध साधु बहु कर्म धर्म फंदयारी।
उरको आय जगत उरझायो अगम निगम विस्तारी।
साच झूठ उर जग प्रबोध कर इन्द्रन स्वाद समारी।
चोखी देह मगन माया में दिन दस की उजियारी।
जैसे सर्प छछूंदर की गति गहिवर सकै न टारी।
जूड़ीराम सतसंग भजन बिन नहिं हो सकत निनारी।





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ