ऐसे प्रनत पाल रघुराई संत जूड़ीराम भजन / Aise Pranat Pal Raghurai Sant Judiram Bhajan

 

ऐसे प्रनत पाल रघुराई
वेद-पुरान विदित महिमा अति संतन के सुखदाई।
राखी पत प्रहलाद भक्त की फटो खंभ अर्राई।
धर नरसिंह असुर संघारे पूरन भक्ति डिढ़ाई।
त्रेतायुग अवतार अवध में लीला ललित सुहाई।
तात मात गृह राजतिलक तज सुरहित वनहिं सिधाई ।
जे जगदीन अधीन अधम अति सब कर विपत गमाई।
जूड़ीराम नाम रघुवर को भजमन तजि कुटलाई।


Comments

Popular posts from this blog

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ