अभिसार / Abhisar Vidyapati

सखि हे, आज जाएब मोहि।।
घर गुरूजन-डर न मानब, वचन चूकब नाहि।।
चाँदन आनि-आनि अंग लेपब, भूषण कए गजमोती।।
अंजन विहुँन लोचन-युगल धरत धवल जोती।।
धवन बसनें तनु झपाओब गमन करब मन्दा।।

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ