सखि हे, आज जाएब मोहि।।
घर गुरूजन-डर न मानब, वचन चूकब नाहि।।
चाँदन आनि-आनि अंग लेपब, भूषण कए गजमोती।।
अंजन विहुँन लोचन-युगल धरत धवल जोती।।
धवन बसनें तनु झपाओब गमन करब मन्दा।।
यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
हिंदी कवि पर कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य और कुछ अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से
सखि हे, आज जाएब मोहि।।
घर गुरूजन-डर न मानब, वचन चूकब नाहि।।
चाँदन आनि-आनि अंग लेपब, भूषण कए गजमोती।।
अंजन विहुँन लोचन-युगल धरत धवल जोती।।
धवन बसनें तनु झपाओब गमन करब मन्दा।।
यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
लोकप्रिय हिंदी भजन लिरिक्स विभिन्न कलाकारों , भक्त कवियों और संतों द्वारा गाए और रचाए गए भजन गीत भक्ति गीत का लिखित संग्रह क्लिक कर पढ़ें एवं...
No comments:
Post a Comment