आजु नाथ एक व्रत / Aaju Nath ek vrat Vidyapati

आजु नाथ एक व्रत मोहि सुख लागत हे .
तोहें सिव धरि नट वेष कि डमरू बजाएव हे.
भल न कहल गौरा रउरा आजु सु नाचब हे .
सदा सोच मोहि होत कवन विधि बांचव हे .
जे जे सोच मोहि होत कहा समुझाएव हे .
रउरा जगत के नाथ कवन सोच लागएव हे .
नाग ससरि भूमि खसत पुहुमि लोटायत हे .
कार्तिक पोसल मजूर सेहो धरि खायत हे .
अमिय चुइ भूमि खसत बघम्बर जागत हे .
होत बघम्बर बाघ बसहा धरि खायत हे .
टूटी खसत रुदराछ मसान जगावत हे .
गौरी कहँ दुख होत विद्यापति गावत हे .

यहाँ पढ़ें – विद्यापति का साहित्य / जीवन परिचय एवं अन्य रचनाएं
 

 

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