आदि अनादि मेरा सांई धरनीदास भजन / Aadi Anadi Mera Sain Dharnidas Bhajan

 

आदि अनादि मेरा सांई।
दृष्ट न गुष्ट है अगम अगोचर
यह सब माया उनकी माई।
जो बनमाली सींचे मूल, सहजै पिवै डाल फल फूल।
जो नरपति को गिरह बुलावै, सेना सकल सहज ही आवै।
जो कोई कर भान प्रकासै तौ निसतारा सहजहि नासै।
गरूड़ पंख जो घर में लावै, सर्प जाति रहने नहिं पावै।
दरिया सुमिरै एकहि राम, एक राम सारै सब काम। 

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