जुवा-जुवी खेलने का गीत / 5 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Jua-Juvi Khelne Ka Geet 5 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics

कांकण डोरे खोलने का गीत

तन महलां बैठ चुगायो रे बनड़ा डोरड़ो भल खुले।
तू तो दूध दही रो धायो रे बनड़ा डोरड़ो भल खुले।
थाने छपर पलंग पर पोढायो रे बनड़ा डोरड़ो भल खुले।
तने ऊखरड़ी बैठ चुगायो रे बनड़ा डोरड़ो भल खुले।
तू तो राबड़ी री पाली रे बनड़ी डोरड़ो नहीं खुले।
तू तो टूटयोड़ी खाट बिछायी ये बनड़ी डोरड़ो नहीं खुले।
तने रकटा री झोली झिलाई ये बनड़ी डोरड़ो नहीं खुले।


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