फेरों-कन्यादान का गीत / 3 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Feron Kanyadan Ka Geet 3 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics
फेरों में चून्दड़ी ओढ़ाने का गीत
कजली देशा रा हंसती ल्यो ये लाड़ली बन्नी, ओढ़ सुहागन चून्दड़ी।
मारु देशा रा करवा ल्यायो, ये लाड़ी, ओढ़े सुहागन बन्नी चून्दड़ी।
लाड़ी ई चून्दड़ कारनै , मै रुसो सो गीत मनायो ये लाड़ली
मैं तो रात ऊंनीदो आयो ये लाडली। ओढ़े सुहागन बन्नी चून्दड़ी।
मैं तो ऊजलो नीर में न्हायो ये लाड़ली।
मैं तो सूरज सामो नहायो ये लाड़ली। ओढ़े सुहागन बन्नी चून्दड़ी।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें