जहाँ में कौन कह सकता है तुम को बे-वफ़ा तुम हो / 'ज़हीर' देहलवी

जहाँ में कौन कह सकता है तुम को बे-वफ़ा तुम हो
ये थोड़ी वज़ा-दारी है कि दुश्मन-आश्ना तुम हो

तबाही सामने मौजूद है गर आशना तुम हो
ख़ुदा हाफ़िज़ है उस कश्ती का जिस के ना-ख़ुदा तुम हो

जफ़ा-जू बे-मुरव्वत बे-वफ़ा ना-आश्ना तुम हो
मगर इतनी बुराई पर भी कितने ख़ुश-नुमा तुम हो

भरोसा ग़ैर को होगा तुम्हारी आश्नाई का
तुम अपनी ज़िद पे आ जाओ तो किस के आशना तुम हो

कोई दिल-शाद होता है कोई ना-शाद होता है
किसी के मुद्दई तुम हो किसी का मुद्दआ तुम हो

'ज़हीर' उस का नहीं शिकवा न की गर क़द्र गरदूँ ने
ज़माना जानता है तुम को जैसे ख़ुशनवा तुम हो

श्रेणी: ग़ज़ल

Comments

Popular posts from this blog

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

Amir Khusrow Dohe Kavita अमीर खुसरो के दोहे गीत कविता पहेलियाँ